ख़्वाब का आसमान हैं आँखें
बेबसी की ज़बान हैं आँखें
इश्क़ का इक बयान हैं आँखें
दर्द की तर्जुमान हैं आँखें
लब रहे चुप तमाम महफ़िल में
रूह की राज़दान हैं आँखें
चाँद तारे निगाह में चमके
रात का आसमान हैं आँखें
तीर बन कर उतर गईं दिल में
हुस्न की इक कमान हैं आँखें
हार कर हम जहाँ ठहर जाएँ
ख़्वाब का वो मकान हैं आँखें
होश गुम हैं निगाह में उस की
सब्र का इम्तिहान हैं आँखें
हिज्र की रात कट गई लेकिन
दर्द का इक निशान हैं आँखें
मय-कदे की ज़रूरतें क्या हैं
साक़िया मेज़बान हैं आँखें
क़ैद कर ले भले ज़माना पर
हौसले की उड़ान हैं आँखें
आज 'हसरत' तमाम ग़ज़लों में
इश्क़ की तरजुमान हैं आँखें
लिख रहा है जो ख़त में तू 'हसरत'
उस का सारा बयान हैं आँखें
Harsh Hasrat