जीवन क्या वनवास नहीं है?
या तुमको आभास नहीं है?
जीतेंगे हम बाज़ी कैसे?
जब ख़ुद पर विश्वास नहीं है
ग़ैर नहीं मैं उनकी लेकिन
रिश्ता भी कुछ ख़ास नहीं है
पास मेरे दरिया है लेकिन
पहले जैसी प्यास नहीं है
भूके सोए हैं बच्चे सब
पर उनका उपवास नहीं है
रूबी मन से हार गई है
उसको जीत की आस नहीं है
Rubi Gupta satyendra