बहुत दिनों से नहीं पी, चलो शराब पिएँ
करेंगे यारों से दिल खोलकर ख़िताब, पिएँ
पड़े हैं आप भी नेकी-बदी के चक्कर में
नशा तो होता है दौलत का भी ख़राब, पिएँ
कि बा-तमीज़, मुहज़्ज़ब हैं शख़्स आप अगर
भलाई है इसी में आपकी इताब पिएँ
करेगी ख़ाक असर ज़ेहन-ओ-दिल पे उसके मय
तमाम उम्र को जिसने बहुत अज़ाब पिएँ
गुलाब पीते थे ग़ुरबत के दौर में यारों
अभी बदल गए हैं दिन तो लाजवाब, पिएँ
सिफ़त शराब की होती दवा-सी है बिल्कुल
सुरूर चढ़ते ही घटता है इज़्तिराब, पिएँ
नहीं है ज़ब्त भी अच्छा तवील अरसे तक
ग़ुबार दिल का निकल जाए कुछ, शराब पिएँ
लिखा था दिल के वरक़ पर हमारा नाम, मगर
पढ़ी गई न हमीं से वो इक किताब, पिएँ
Himanshu Vyas