कपिलवस्तु में दीवाली है
लेकिन राजमहल ख़ाली है
दीप नगर के देखे राहुल बार-बार मचले
इस दीवाली राजमहल में दीपक नहीं जले!
ऐसा नहीं कि अपने पति पर
यशोधरा को गर्व नहीं है
फिर भी राजमहल में ऐसा-
लगता , कोई पर्व नहीं है,
भीतर का अँधियारा बाहर का प्रकाश निगले
इस दीवाली राजमहल में दीपक नहीं जले!
उधर तपस्वी वन में बैठा
देख रहा जग का अँधियारा
तन से ज्योति पुंज बहता है
हुआ प्रकाशित जंगल सारा
थोड़े किरण समूह वहाँ से जग की ओर चले
इस दीवाली राजमहल में दीपक नहीं जले!
धीरे-धीरे हुए प्रकाशित
सारे प्राणी धरती भर के
यह कैसे हो पाता, दिखते
यदि केवल अँधियारे घर के
नदियाँ तभी बहेंगीं जब पर्वत से हिम पिघले
इस दीवाली राज महल में दीपक नहीं जले!
Gyan Prakash Akul