कोई ज़ुल्म का आलम देर तक नहीं रहता
दर्द-ओ-चीख़ का मातम देर तक नहीं रहता
इन बहारों-पतझड़ का आना-जाना रहता है
टिक के कोई भी मौसम देर तक नहीं रहता
एक दिन तो हाथों से इक़तेदार गिरना है
बाजुओं में भी तो दम देर तक नहीं रहता
मुझको तेरी चाहत पर कल यक़ीन था लेकिन
कुछ भी तो मगर हमदम देर तक नहीं रहता
MOHAMMAD RAFAY JAAMI