Shazia niyazi

निहत्थी दाद ने मारा है हमको
तेरे इरशाद ने मारा है हमको

तुम्हारे इश्क़ ने काँधा दिया था
तुम्हारी याद ने मारा है हमको

किसी से क्या करें शिकवा यहाँ पर
दिल-ए-बर्बाद ने मारा है हमको

मुसीबत रोज़मर्रा बढ़ रही है
ये किस अफ़ताद ने मारा है हमको

ज़मीं पर ख़्वाब जन्नत के दिखाकर
किसी शद्दाद ने मारा है हमको

तुम्हारे साथ थे हम जाविदाँ पर
तुम्हारे बाद ने मारा है हमको

बड़ी मनहूस है ये ज़िंदगानी
इसी ईजाद ने मारा है हमको

हमारी लाश भी तक़सीम कर दो
अगर औलाद ने मारा है हमको
Shazia niyazi