क्या छुपाना है क्या छुपाते हैं
आप ये बोझ क्यों उठाते हैं
हम समझते हैं ख़ूब दुनिया को
ख़ुद को ही कम समझ में आते हैं
तुमको होता नहीं भरोसा क्यों
हम भरोसे पे जाँ लुटाते हैं
रास्ते और हैं जमाने में
आप हिम्मत क्यों हार जाते हैं
राह कोई पकड़ के चलिये ना
रास्ते सब वहीं पे जाते हैं
आप ख़ुद की तरफ़ भी कर लीजे
आईना जो हमें दिखाते हैं
एक बस आप ही नहीं साहेब
इश्क़ में सब फ़रेब खाते हैं
ख़ुद को देखूँ जो तेरी नज़रों से
नुक्स ही नुक्स निकल आते हैं
Shravan Kumar