MOHAMMAD RAFAY JAAMI

जब रो पड़ा बयां मैं रूदाद करते-करते
हंसने लगा था ज़ालिम वो इनाद करते-करते

मेरी बेबसी पे हावी तेरा इंतज़ार ठहरा
मुझे नींद आ गई थी तुझे याद करते-करते

मेरा टूटकर बिखरना तेरा आए दिन संवरना
आबाद हो गया तू बर्बाद करते-करते

दुनिया में बसने वालो एहसास मर गए क्या?
साइल जो रो पड़ा है फ़रियाद करते-करते

कासे में दिल के हमने उल्फ़त भीख माँगी
पीछे हटा इक इंसाँ इमदाद करते-करते

यूँ ही न आई जामी बागात पर ये रौनक़
मैंने लहू निचौड़ा आबाद करते-करते
MOHAMMAD RAFAY JAAMI