ख़ूबरु भी है बहुत प्यार का रस्ता लेकिन
पुरखतर इतना नहीं हमने ये जाना लेकिन
चंद लम्हों की बड़ी भीड़ इक्ट्ठा होगी
तय सफ़र करना हमें होगा ये तन्हा लेकिन
मेरे सीने में जो दिल है ये दौलत किसकी
ख़ुद में ही डूबे रहे कुछ नहीं सोचा लेकिन
अश्क इक उनका गिरा शोर फ़ज़ा में गूंजा
ख़ू बहा मेरा हुआ भी नहीं चर्चा लेकिन
ज़िंदगी हमने असद जिसपे निछावर कर दी
हो सका फिर भी नहीं सख्श वो मेरा लेकिन
Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)