Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)

हर ख़ुशी नज़्र-ए-यार करते हुए
हम चले जां निशार करते हुए

ज़िंदगी इस तरह से गुज़री है
अपने ग़म का शुमार करते हुए

कौन गुज़रा है मेरी गलियों से
हर फ़ज़ा मुश्क-बार करते हुए

उसकी चौखट पे सर झुकाता हूं
आंख को अश्क़-वार करते हुए

चांद उतरा न मेरे आंगन में
थक गए इंतज़ार करते हुए

ऐ असद हर जगह मिला धोखा
मर गए ऐतबार करते हुए
Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)

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