Avinash Bandhu

ज़िन्दगी का हर मआनी बेमआनी हो गया
यूँ ढला किरदार में वो ख़ुद कहानी हो गया

बज़्म में आने से उनके रोशनी ऐसी हुई
चाँद भी शरमाके ख़ुद से पानी-पानी हो गया

हाथ पीले हो गए लो प्रेम की हर साध के
आँख में सपनों का मौसम जाफ़रानी हो गया

दर्द ने हँसकर पकड़ ली बाँह कमसिन प्यार की
दिल मेरा अश्कों की उजड़ी राजधानी हो गया

तपती धरती से मिला जो 'बन्धु' फिर से टूटके 
श्याम रंगी मेघ खिलके धानी-धानी हो गया
Avinash Bandhu