Aarav Shukla

उसके धोखे पर फ़िदा हूं सादगी क्या चीज़ है
दिल गधी पे आ गया है तो परी क्या चीज़ है

कितने मासूमों को ले डूबी क़ियादत आपकी
आप बतलाएंगे मुझको रहबरी क्या चीज़ है

तिरगी के साथ इक लम्हा बिताकर देख लो
जान जाओगे उसी पल रोशनी क्या चीज़ है

इन सितारें से ना पूछो चांदनी का मर्म तुम
चाँद ही ये जानता है चांदनी क्या चीज़ है

ख़ुदकुशी का दिल करे तो तुम पिता से पूछना
ख़ुदकुशी क्या चीज़ है और ज़िंदगी क्या चीज़ है

दिल को बीनाई अता कर लो, ख़बर हो जाएगी
इश्क़ क्या है, रूह क्या है, आशिक़ी क्या चीज़ है

हर ग़ज़ल में कह रहा हूँ हाल दिल का मैं मगर
वो कहां ये जानती है शायरी क्या चीज़ है
Aarav Shukla