निगाहों में ज़ुल्मत का चेहरा ज़बां है
मेरे हम-सफ़र हम-नवा तू कहां है?
सदा बुलबुलों की सुनाई न देती
सहर पुरमुनव्वर दिखाई न देती
अजब सी घुटन ख़ौफ़ वहशत अयां है
मेरे हम-सफ़र हम-नवा तू कहां है?
न पेड़ों की डालों पे झूले कहीं भी
न सावन के महके सवेरे कहीं भी
लबों पर फ़जाओँ की आहो फ़ुगाँ है
मेरे हम-सफ़र हम-नवा तू कहां है?
उदासी के बाहों में रातें गुज़रती
न आती हैं नींदें न आहें ठहरती
जिगर जल रहा ये हवा बद-गुमां है
मेरे हम-सफ़र हम-नवा तू कहां है?
वफ़ाओं के सीने में जज़्बा नहीं है
मुहब्बत के होठों पे नग़्मा नहीं है
कहां अब असद जा रहा कारवां है
मेरे हम-सफ़र हम-नवा तू कहां है?
Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)