रोटी के लिए शहर में क्या-क्या नहीं करतेघर वालों को लेकिन कभी रुसवा नहीं करतेमजबूरी कभी आए तो मर्दों में है ख़ूबीमज़दूरी तो करते हैं ये मुजरा नहीं करतेArman Habib