Kunal kumar

बच बचा कर कमीन लोगों से
घिर गया हूँ हसीन लोगों से

और भी दूद है जमाने में
हो गया अब यक़ीन लोगों से

अपने हक़ के लिए भी लड़ जाऊँ
क्यों डरूँ मैं अमीन लोगों से

कुछ तो मतलब निकल ही आता है
बात करके मतीन लोगों से

छोड़ कर सब पढो लिखो यारों
ख्व़ाब हासिल ज़हीन लोगों से

अपने हिस्से की रात करनी थी
छूप छूपा के तीन लोगों से

कुछ नहीं हो सका वफ़ा कामिल
मिट गया सब हज़ीन लोगों से
Kunal kumar