Anuj Abr

अब्र जिस रोज़ बरसते हैं ये काले वाले
चंद घंटो में ही भर जाते हैं नाले-वाले

चलता रहता हूँ कि चलने का नशा है मुझको
पड़ते रहते हैं मेरे पाँव में छाले-वाले

रुक ज़रा एक दफ़ा और तसल्ली कर लें
ठीक से बंद सभी हैं तो न ताले-वाले

घुप अँधेरे में कई दिन से पड़े हैं तन्हा
नाम अपना जो बताते थे उजाले वाले

भूल जाने को हूँ तैयार सभी कुछ मैं भी
साफ़ कर ज़ेहन से तू भी तो ये जाले-वाले
Anuj Abr