Disha 'Azal'

बिछड़कर भी अगर जी जाएं तो रोया करेंगे हम
तुम्हारे बाद इस दुनिया में आख़िर क्या करेंगे हम

कहीं राधा के मीरा ही न बन जाएं तुम्हारे बिन
किसी जोगन के जैसे उम्र फिर काटा करेंगे हम

हमारी साँस हम पर ही क़यामत कुछ यूँ ढाएगी
कि दिन और रात मरने की दुआ माँगा करेंगे हम

हमें मालूम है दर्द-ए-मुहब्बत की दवा तुम हो
अजब इस रोग की तुमसे शिफा चाहा करेंगे हम

ख़याल-ए हिज़्र से ही हो गई है नम अगर आँखें
जुदा होकर यहाँ सैलाब भी लाया करेंगे हम
Disha 'Azal'