दिन भर भागा करता हूँअपना पीछा करता हूँख़ुद से परदा करके मैं ख़ुद को तन्हा करता हूँपरखा जाता हूँ हर रोज़,रोज़ ही सीखा करता हूँबस इक चेहरे की ख़ातिर दर्पन देखा करता हूँखामोशी में अक्सर मैंज़ोर से बोला करता हूँShravan Kumar