अस रूप अनूप कहे गति कौन लुटी मृदुता सब चालन पे।शत-सूर्य प्रकीर्णन रश्मि करें अस तेज सखी उन गालन पे।रस-रास रचे वह कुंजन मध्य व नृत्य करे फन व्यालन पे।छवि देख लुटे सब धाम धरा,बलिहार तिहूँपुर लालन पे।GARIMA MISHRA