GARIMA MISHRA

यंत्रवत् जीवन जिएँ वे, यंत्र होना है जिन्हें।
स्वार्थ की कुत्सित धरा का, तंत्र होना है जिन्हें।
व्यर्थ शब्दों को लुटाते वाक् से अनभिज्ञ हैं जो
मौन रहते हैं अधिक वे, मंत्र होना है जिन्हें।
GARIMA MISHRA