तुम्हारी याद आएगी मुझे जब

तुम्हारी याद आएगी मुझे जब!

सजल-दृग-गात द्वै होंगे
हरष-मकरंद बहकेंगे।
वियोगी अश्रु छू-छूकर,
अधर-धर-हव्य दहकेंगे।

नदी सुधि की डुबाएगी मुझे तब,
तुम्हारी याद आएगी मुझे जब।

मिलेगी मोद की मदिरा,
करुण-कमनीय-धारा से।
प्रवाहित स्वप्न होंगे फिर,
नयन की कोर कारा से।

हवा छूकर जलाएगी मुझे तब,
तुम्हारी याद आएगी मुझे जब।

विकल होगा प्रणय-कानन,
विरह की रातरानी से।
नयन त्राटक करेंगे जब,
जलेगा दीप पानी से।

अमा लेकिन चिढ़ाएगी मुझे तब,
तुम्हारी याद आएगी मुझे जब।
GARIMA MISHRA