हमको ज्ञानी लोग बताएँ
मंदिर बदलें या प्रतिमाएँ?
जिनको अपना कहकर हम महिमामण्डित करते रहते हैं
वे पूजा के बदले हमको ही दण्डित करते रहते हैं
हम कब तक आरतियाँ गाएँ?
मन्दिर बदलें या प्रतिमाएँ?
हमने प्राण प्रतिष्ठा की है तब पत्थर ईश्वर हो पाया
पत्थर में ईश्वर होने का हमने ही है भ्रम उपजाया
कह दो भ्रम से बाहर आएँ
मंदिर बदलें या प्रतिमाएँ?
हमको क्या हम नयी मूर्ति को देव बनाकर प्राण भरेंगे
देव बनाने वाले हैं हम पाषाणों से नहीं डरेंगे
वैसे भी हम क्यों डर जाएँ
मंदिर बदलें या प्रतिमाएँ?
Gyan Prakash Akul