Sohil Barelvi

हर इक सम्त से दुख आता है दिल दुख जाता है
अपना कोई बिछड़ जाता है दिल दुख जाता है

पहले तू आवाज़ लगाता ख़ुश हो जाता था
अब कोई और बुलाता है दिल दुख जाता है

मेरी खुशियाँ छीनने वालों से तू वाक़िफ़ है
फिर भी उनके गुन गाता है दिल दुख जाता है

इक कमरे में सन्नाटे में , मैं चुपचाप पड़ा
कोई दस्तक दे जाता है दिल दुख जाता है

जाने अनजाने में सामने जब कोई आ जाए
नाम तुम्हारा दोहराता है दिल दुख जाता है

गैंरों से उम्मीद नहीं है आस नहीं है पर
जब तू दूर नज़र आता है दिल दुख जाता है

मेरे दिल में ग़म ही ग़म हैं आँखें नम ही नम
सामने वाला मुस्काता है दिल दुख जाता है

कितनी साँसे इस साहिल पर टूट गईं सोहिल
जब कोई पाँव बढ़ाता है दिल दुख जाता है
Sohil Barelvi