हमारा दिल अब न जाने क्यूँकर उसी ज़मीं पर ठहर गया है
जहाँ निगाहें मिलीं थीं पहले वहीं पे आकर ठहर गया है
कभी भी दिल गर तड़प उठे तो ज़रूर हमको तू याद करना
कि ख़्वाब बनकर तुम्हारी आँखों में फिर से उतरूँगा याद रखना
ग़ज़ाल आँखें किताब चेहरा गुलाब लब दिल-फ़रेब ज़ुल्फ़ें
सितारों जैसी चमक है तुझमें तुम्हारे आँसू हैं जैसे झरना
ख़याल मौसम-सा है सुहाना ये दिल के अंदर ठहर गया है
हमारा दिल अब न जानें क्यूँकर उसी ज़मीं पर ठहर गया है
हवा में घुलकर तुम्हारी ख़ुशबू अभी भी दिल-सा धड़क रही है
तुम्हारे नामों का जाम पी कर ग़ज़ल हमारी बहक रही है
कभी किसी से अगर बिछड़ कर धुआँ-धुआँ हो न ज़िन्दगी में
तो फिर ये समझो कि ज़िंदगानी ये आग बनकर दहक रही है
वही नज़ारा वही करिश्मा वही समंदर ठहर गया है
हमारा दिल अब न जानें क्यूँकर उसी ज़मीं पर ठहर गया है
Arman Habib