Shravan Kumar

किसके मन का होता है
काहे को तू रोता है

क्या यूँ ही कहते हैं लोग
जो होना है होता है

हँसता है वो ऊपर से
अंदर-अंदर रोता है

जिसको बोझ समझते हो
सबका बोझ वो ढोता है

ख़्वाहिश तेरी फूलों की
काँटे ही तू बोता है

किसकी क़ैद में है ये मन
मन ये किसका तोता है

रोज़ कहानी सुनकर ही
बच्चा मेरा सोता है
Shravan Kumar