गर्दिशों में अभी सितारा है
जुर्म सब इसलिए हमारा है
दर्द तकलीफ़ और रुस्वाई
इश्क़ में आम-सा ख़सारा है
छोड़ जाने से पहले मर जाना
बे-वफ़ाई का ये कफ़ारा है
अब तो बच्चे भी हो गए उसके
अब तू किसके लिए कुँवारा है
इश्क़ में हाल था जो मजनूँ का
हाल ऐसा अभी हमारा है
हम सँवारेंगे आख़िरत उसकी
तुमने बस ज़ुल्फ़ को सँवारा है
Nasir Hayaat