Nasir Hayaat

दिल हवा में उछालकर देखो
जान आफ़त में डालकर देखो

रोज़ ताज़ा मिलेगा ज़ख़्म तुम्हें
इश्क़ का रोग पालकर देखो

मैंने अब तक तुम्हें सँभाला था
अब मुझे तुम सँभालकर देखो

इक दफ़ा भी न मुड़के देखूँगा
तुम मिरी बात टालकर देखो
Nasir Hayaat