Himanshu Vyas

भर आई नज़र मन ये हल्का हुआ
बड़ी मुद्दतों बाद मिलना हुआ

ज़ुबां लड़खड़ाई कई मर्तबा
निगाहों में था दिल ये अटका हुआ

जबीं चूम रुख़्सत किया था जिन्हें
उन्हें लौट आने में अर्सा हुआ

शब-ए-वस्ल क़ुदरत थी मुस्काई-सी
है शबनम से पत्तों पे लिक्खा हुआ

उन्हें ज़ेब देती नहीं चश्म-ए-नम
ज़रा पौछ दूँ अश्क ढलका हुआ

मिरे दर्द से कोई वाक़िफ़ न था
ग़ज़ल में पिरोया तो चर्चा हुआ
Himanshu Vyas