ठोकर लगा के मुझको वो हैरान कर गया
दुनिया मेरी वो जाते ही वीरान कर गया
इज़्ज़त से गर मिले जो न तो भीख न लूँगा
तक़्वा ये इस फ़क़ीर को सुल्तान कर गया
मुद्दत से जुस्तुजू थी तमन्ना-ए-दीद की
उल्फ़त की आरज़ू का ये नुक़सान कर गया
हम लोग अब तो इश्क़ में ठुकरा दिए गए
कैसा ये ज़ुल्म हम पे वो नादान कर गया
अच्छा हुआ जो हमको भी आज़ाद कर दिया
अल्लाह के करम से ये एहसान कर गया
हैरानियाँ हुई ये उसे ख़ुद ही सोच कर
मुश्किल वो अब अदीब की आसान कर गया
Tufail Adeeb