आस्तीन के जो हैं साँप ये, इन सभी का भरोसा नहीं
दुश्मनी चाहे जितनी करो, दोस्ती का भरोसा नहीं
शौक़ दिल में नया पालिए, सबको अपना बना लीजिए
मौत है आख़िरी रास्ता, ज़िंदगी का भरोसा नहीं
थक गया हूँ बहुत मैं ख़ुदा, तुझसे क्या-क्या शिकायत करूँ
अपने हाथों से ही जान लो, ख़ुदकुशी का भरोसा नहीं
जो जवानी में हमराह था, वो बुढ़ापे का साथी नहीं
जिसको पालें बड़े शौक़ से, अब उसी का भरोसा नहीं
मैं गुनहगार हूँ ख़ुद का ही, बेवफ़ा से जो की दिल्लगी
दिल न देना मेरे यार तुम, दिल्लगी का भरोसा नहीं
Dheeraj kumar verma