निकाला बीच से जा सकता था उस बात को लेकिनग़लत-फ़हमी बढ़ी इतनी दिलों को शक से भर डालाबहुत छोटी सी कोई बात थी जिस पर लड़े थे हममगर उस बात ने ही दरमियाँ सब ख़त्म कर डालाMohit Subran (मोहित सुब्रन)