navin kumar shukla

सच का ताज़ा बयान आँखें हैं।
दिल की मेरे ज़बान आँखें हैं।।

अब तो मेरा भी हुस्न है चमका,
मुझ पे अब मेहरबान आँखें हैं।।

सुन के आवाज चमकी बीनाई,
यूँ लगा जैसे कान आँखें हैं।।

मुझको चेहरा नहीं है याद उसका,
मुझको बस उसकी ध्यान आँखें हैं।।

हाल दिल का निगाहें कह देंगी,
जैसे दिल की दुकान आँखें हैं।।

उसकी आँखों को देखकर जाना,
दर्द का खानदान आँखें है।।

उसको दिल देके आ गया सालिक,
जिसके चेहरे की शान आँखें हैं।।
navin kumar shukla