Swarika Kirti

बात कहाँ थी ? बात तो आनी जानी थी
ये मत पूछो कैसी प्रेम कहानी थी ?

आँसू थे, तनहाई थी, बेचैनी थी,
उम्र रही जैसी भी, हमें निभानी थी !

दुनिया हमको समझ न पाई, वाजिब था,
लेकिन तुमसे तो पहचान पुरानी थी !

बर्फ़ जमी सी लगती है जो झीलों पर
इससे पहले ये आंखों का पानी थी

उसने क्या दिखलाया ? उसकी ख़ता नहीं
मैने क्या देखा, मेरी नादानी थी !

कोशिश की थी तुम पर सच्ची ग़ज़ल कहूँ
सच बोलूं वो ग़ज़ल बड़ी बे-मानी थी !

दर्द, शराबों का उन बच्चों से पूछो,
जिनकी रोटी उसके बदले आनी थी !

लड़की जो अब गाली भी सुन लेती है,
वो भी कभी किसी की गुड़िया रानी थी !

वैसे भी थी राह अलग हम दोनों की,
तुमको दौलत, हमको चाहत पानी थी

आख़िर कैसे दर्द न मिलते इस दिल को
आख़िर गीत-ग़ज़ल में रंगत आनी थी
Swarika Kirti