Swarika Kirti

उम्र भर इस उम्र से शिकवा - गिला चलता रहा,
इस तरह इस ज़िन्दगी का सिलसिला चलता रहा !

हमसफ़र थे ! हम सफ़र में साथ तो चलते रहे,
बीच दोनों के मगर एक फ़ासला चलता रहा !

ख़्वाहिशें अपनी जगह थीं, ज़िन्दगी अपनी जगह,
चाहतों पर किस्मतों का फैसला चलता रहा !

साथ किसके कौन था इस ज़िन्दगी की राह में?
और कहने को सफ़र में काफ़िला चलता रहा !

इस तरह हमने सफ़र ये साथ मिलकर तय किया,
थक गए जब हम, हमारा हौसला चलता रहा !

बेटियां देकर के सारी दौलतें दे दी गईं,
पर हिसाबों में 'मिला-क्या ना मिला' चलता रहा !

कल दर-ए-इंसाफ पर फिर कोई जल कर मर गया,
और अंदर मसअले पर मसअला चलता रहा !
Swarika Kirti

Swarika Kirti | We The Sukhanwar