Dharmesh Solanki

बस बातें बनाते हो सुधर क्यूँ नहीं जाते
जो करना है तुम को कभी कर क्यूँ नहीं जाते

जो थक ही गए हो तो ठहर क्यूँ नहीं जाते
जीना नहीं आसान तो मर क्यूँ नहीं जाते

क्यूँ इतने थके-हारे से फिरते हो जहाँ में
मय के किसी दरिया में उतर क्यूँ नहीं जाते

पूरे नहीं कर पाते तो शर्मिंदा से क्यूँ हो
वा'दों से कभी अपने मुकर क्यूँ नहीं जाते

इक सोग में तुम उम्र गँवाने पे तुले हो
इक ढूँड के आईना सँवर क्यूँ नहीं जाते

ये लोग कमाते हैं जो मुश्किल से दग़े से
फिर अपने जनाज़े में वो भर क्यूँ नहीं जाते
Dharmesh Solanki