हर इक लम्हे में हम हँसते हुए माना नहीं होतेमगर ऐसे भी तो रो-रो के यूँ ज़ाया नहीं होतेबिता तू भी रहा है ज़िन्दगी तन्हाइयों में हीअगर हम साथ होते आज तो तन्हा नहीं होतेMohit Subran (मोहित सुब्रन)