तुमने देखा ही नहीं मुझ में हुनर दिखता है
इस ज़माने पे तो मेरा ही असर दिखता है
अब कहाँ आप मुहब्बत से मुझे देखते हैं
अब कहाँ आप के दिल में मिरा घर दिखता है
घर से चलता हूँ तो चलतीं हैं दुआएँ माँ की
मुझको हर रास्ता बेख़ौफ़ ख़तर दिखता है
लाख़ मुश्किल हो भले पाँव बढ़ाएँ चलना
मुश्किलों से जो गुज़रता है गुहर दिखता है
पत्थरों पे भी निशाँ रस्सी का छप जाता है
जीत से पहले यहाँ सबको ही डर दिखता है
Dheeraj kumar verma