Dheeraj kumar verma

तुमने देखा ही नहीं मुझ में हुनर दिखता है
इस ज़माने पे तो मेरा ही असर दिखता है

अब कहाँ आप मुहब्बत से मुझे देखते हैं
अब कहाँ आप के दिल में मिरा घर दिखता है

घर से चलता हूँ तो चलतीं हैं दुआएँ माँ की
मुझको हर रास्ता बेख़ौफ़ ख़तर दिखता है

लाख़ मुश्किल हो भले पाँव बढ़ाएँ चलना
मुश्किलों से जो गुज़रता है गुहर दिखता है

पत्थरों पे भी निशाँ रस्सी का छप जाता है
जीत से पहले यहाँ सबको ही डर दिखता है
Dheeraj kumar verma

Dheeraj kumar verma | We The Sukhanwar