Vimal kumar vimal

फूल जैसी आपको भी ताज़गी मिल जाएगी
खिलखिलाओगे अगर दिल से ख़ुशी मिल जाएगी

हम ग़रीबों के मुक़द्दर में कहाँ लिक्खा है कुछ
ज़र - ज़मीं को छोड़ कर ज़िंदादिली मिल जाएगी

दूर तक फैली हुई है तीरगी माना यहाँ
हौसला दिल में रखोगे रोशनी मिल जाएगी

आप जैसा हमसफ़र मुझको अगर मिल जायेगा
ज़िंदगी को ज़िंदगी भर ज़िंदगी मिल जाएगी

डायरी ग़मगीन की जब तुम पढ़ोगे तब 'विमल'
सूरते - ग़म हर वरक़ पर शाइरी मिल जाएगी
Vimal kumar vimal