मोहब्बत

तिरी मोहब्बत ने मेरे हमदम
किया है कुछ मुझ पे ऐसा जादू

न दिन को है चैन तेरे बिन कुछ
न मुझ को रातों को नींद आए

मिरी नज़र में तू ही बसी है
ख़याल तेरा हर इक घड़ी है

फ़ज़ा में ख़ुशबू तिरे बदन की
कि जैसे बुलबुल है तू चमन की

बसा है नज़रों में तेरा जल्वा
है हर घड़ी बस ख़याल तेरा

बहार-ए-गुलशन में तुझ से रंगत
चमन में है सब ये तेरी निकहत

गुलों में देखूँ शजर में देखूँ
तुझे ही शाम-ओ-सहर में देखूँ

है तुझ से ऐ यार दिल को चाहत
क़ुबूल कर ले मिरी मोहब्बत

न उलझनों में तू डाल मुझ को
मैं गिर न जाऊँ सँभाल मुझ को

है मेरे दिल की यही तमन्ना
तू साथ मेरे रहे हमेशा

तो ज़िंदगी में बहार आए
दिल-ए-हज़ीं को क़रार आए
Faisal Qadri Gunnauri