Aman Alfaaz

ज़मीन-ए-दिल को कुरेदो शरर निकल आए
हुजूम-ए-शब से उलझ कर सहर निकल आए

उदासियों की तहों पर उतर कभी ऐ दिल
अजब नहीं जो सदफ़ में गुहर निकल आए

हवा-ए-सब्र से खुलते हैं बंद दरवाज़े
अगर ये परतें हटें तो हुनर निकल आए

यही बहुत है की राहों में साथ है कोई
दुआ करो ये वही चारागर निकल आए

निगाह फेर के चुपचाप चल दिए वो मगर
नज़र से देखिए शायद असर निकल आए
Aman Alfaaz

Aman Alfaaz | We The Sukhanwar