Sani Singh

जब मुक़द्दर के सितारे रूठते हैं
जिंदगी के सब सहारे छूटते हैं

सख़्त धागे भी तअल्लुक़ के यहाँ पर
सिर्फ़ नाकामी की ज़द से टूटते हैं
Sani Singh