ज़ुल्मतों के ख़ौफ़ को दिल से मिटाकर देखिए
इक दफ़ा उम्मीद की शम्मा जलाकर देखिए
फूल बनकर जो महकना है चमन में आपको
पहले ख़ुद को ख़ाक में थोड़ा मिलाकर देखिए
क्या ज़रूरी है कि हर सौदा मुनाफ़े का ही हो
इश्क़ में ख़ुद को कभी पूरा लुटाकर देखिए
दूर होगी हर शिकायत ज़िंदगी से जो भी है
आप केवल ज़िंदगी से दिल लगाकर देखिए
दर्द की तफ़्सीर मुमकिन ही नहीं है लफ़्ज़ में
आँख के आँसू को पन्नों पर सजाकर देखिए
ढूँढते हो क्यों भला बाहर सुकूँ के सिलसिले
फिक्र को अपनी ज़रा रहबर बनाकर देखिए
Sani Singh