Sani Singh

ज़ुल्मतों के ख़ौफ़ को दिल से मिटाकर देखिए‌
इक दफ़ा उम्मीद की शम्मा जलाकर देखिए

फूल बनकर जो महकना है चमन में आपको
पहले ख़ुद को ख़ाक में थोड़ा मिलाकर देखिए

क्या ज़रूरी है कि हर सौदा मुनाफ़े का ही हो
इश्क़ में ख़ुद को कभी पूरा लुटाकर देखिए

दूर होगी हर शिकायत ज़िंदगी से जो भी है
आप केवल ज़िंदगी से दिल लगाकर देखिए

दर्द की तफ़्सीर मुमकिन ही नहीं है लफ़्ज़ में
आँख के आँसू को पन्नों पर सजाकर देखिए

ढूँढते हो क्यों भला बाहर सुकूँ के सिलसिले
फिक्र को अपनी ज़रा रहबर बनाकर देखिए
Sani Singh

Sani Singh | We The Sukhanwar