देवेश त्रिपाठी

मैं तो कबसे पतझर में हूँ
तुम आओ तो सावन हो
एक क़दम रख दो चौखट पर
मेरा घर भी पावन हो

दुनिया हरियाली में डूबी
पर मैं शोक मनाता हूँ
जो कजरी तुमको पसंद थी
अब तक उसको गाता हूँ
मन के आगन में आ बरसो
जीवन फिर से मधुवन हो


सुनो मेघ तुम जमकर बरसो
जिसमें आँसू छुप जाए
या फिर ऐसा मौसम कर दो
मेरा प्रियतम रुक जाए
एक मधुर आलिंगन में ही
सारे सुख का दरपन हो


जी चाहे जो बाते करना
मैं बस तुमको देखूँगा
मुड़कर देखोगे यदि मुझको
याद रहे मैं रोकूंगा
दुहराना मत पिछली ग़लती
करना जो मनभावन हो
देवेश त्रिपाठी

देवेश त्रिपाठी | We The Sukhanwar