ठीक बस होते नहीं उपचार से
ख़ैरियत भी पूछिए बीमार से
हो गई है ग़म की तो केवायसी
दुख हमारे लिंक है आधार से
कुछ क़लम से काम लेना सीख लो
काम सब होते नहीं तलवार से
क्या हुआ है आज के इस दौर को
रौनकें आती नहीं त्योहार से
अन्नदाता छोड़ दे गर खेतियाँ
भूख से लाशें उठें बाज़ार से
इस धरा पर ज़ुल्म इतने बढ़ गए
अब फ़क़त उम्मीद है अवतार से
एक मुद्दत से खड़ा हूँ मैं इधर
वो बुलाता ही रहा उस पार से
गर कभी ये साँस मेरी रुक गई
जी उठूँगा आपके दीदार से
एक पव्वे में मत अपना बेचकर
अब शिकायत कर रहे सरकार से
जब मुझे रोने को कंधा न मिला
तब लिपट कर रो लिया दीवार से
मुफ़लिसी पर देंगे वो भाषण बड़ा
जो अभी उतरे हैं महँगी कार से
Deepak Malviya