Deepak Malviya

ठीक बस होते नहीं उपचार से
ख़ैरियत भी पूछिए बीमार से

हो गई है ग़म की तो केवायसी
दुख हमारे लिंक है आधार से

कुछ क़लम से काम लेना सीख लो
काम सब होते नहीं तलवार से

क्या हुआ है आज के इस दौर को
रौनकें आती नहीं त्योहार से

अन्नदाता छोड़ दे गर खेतियाँ
भूख से लाशें उठें बाज़ार से

इस धरा पर ज़ुल्म इतने बढ़ गए
अब फ़क़त उम्मीद है अवतार से

एक मुद्दत से खड़ा हूँ मैं इधर
वो बुलाता ही रहा उस पार से

गर कभी ये साँस मेरी रुक गई
जी उठूँगा आपके दीदार से

एक पव्वे में मत अपना बेचकर
अब शिकायत कर रहे सरकार से

जब मुझे रोने को कंधा न मिला
तब लिपट कर रो लिया दीवार से

मुफ़लिसी पर देंगे वो भाषण बड़ा
जो अभी उतरे हैं महँगी कार से
Deepak Malviya