Deepak Malviya

इसी उलझन में रहता हूँ हमेशा
अकेलेपन में रहता हूँ हमेशा

तुम्हारी ये निगाहें कह रही हैं
तुम्हारे मन में रहता हूँ हमेशा

हुए छह साल पर भूला नहीं मैं
उस आलिंगन में रहता हूँ हमेशा

उदासी ही उदासी है जहाँ पर
उसी इक वन में रहता हूँ हमेशा

पहेली है कोई उलझी हुई तू
तेरे चिंतन में रहता हूँ हमेशा

मैं तेरे घर की तुलसी का हूँ दीपक
तेरे आँगन में रहता हूँ हमेशा
Deepak Malviya