Santosh sagar

आये नहीं थे तुम यहाँ तब का ये मुल्क है!
ज़ालिम से जाके बोल दो सबका ये मुल्क है!

इस मीडिया को नेता से करना था जो सवाल
वो कर रहे हैं हमसे गज़ब का ये मुल्क है!

जब रब के घर को रब के ही लोगों ने लूटा है
कैसे यक़ीन कर लूँ कि रब का ये मुल्क है!

जिनको भरम है मुल्क़ पे बस हक़ मिरा ही है
वो सुन ले आज डेढ़ अरब का ये मुल्क है!

नफरत फ़िज़ा में घोल के करते हैं बात लोग
कैसे मैं कह दूँ यार! अदब का ये मुल्क है!
Santosh sagar