Shivendra Mishra

छोड़कर गुण-दोष गणना दूसरों की
आत्मचिंतन का समय है।।

यह समय है इक नई प्रस्तावना का।
यह समय है प्रेम का, सद्भावना का।
यह समय है न्याय पुनर्स्थापना का।
जातिगत दुर्भावना से दूर होकर
युग-प्रवर्तन का समय है।।

यह समय है मुट्ठियों को भींचने का।
यह समय है शोर करने, चीखने का।
यह समय है नवल रेखा खींचने का।
शब्द में अब तेज भरकर बिजलियों सा
मेघ गर्जन का समय है।।

इस समय बोलो तो खुलकर सत्य बोलो।
इस समय कविता में मन की गांठ खोलो।
इस समय तुम नव स्वरों में ओज घोलो।
भर सके जो चेतना नवपीढ़ियों में
श्रेष्ठ सर्जन का समय है।।

इक नया संकल्प धरने का समय यह।
राष्ट्रहित हुँकार भरने का समय यह।
स्वप्न सब साकार करने का समय यह।
स्वार्थप्रेरित भावनाओं को तजो अब
यह समर्पण का समय है।।
Shivendra Mishra