Sohil Barelvi

आग में ख़ुद को अकेला ही मैं जाने दूँगा
जिस्म पर तेरे कभी आँच न आने दूँगा

इस क़दर रूठ के बैठा हूँ मैं इस दुनिया से
मैं मनाऊंगा ना अब इस को मनाने दूँगा

अपनी रूदाद कहूँगा मैं ख़ुदा से सीधे
क्यों ज़माने को जिगर अपना दुखाने दूँगा

मैं भी हालात का मारा हूँ वगरना जानां
मैंने सोचा भी नहीं था तुम्हें ताने दूँगा

राह आसान करूँगा मैं सभी की इक दिन
दूर जाना है जिसे मुझ से मैं जाने दूँगा

और तकलीफ़ उठाऊंगा तो मर जाऊँगा
अपनी आँखों को मैं अब अश्क बहाने दूँगा

हाथ फैलाना पड़े आगे कभी दुश्मन के
मोड़ पर ऐसे कभी ख़ुद को न आने दूँगा
Sohil Barelvi

Sohil Barelvi | We The Sukhanwar