कितनी ही बातें जीवन की
गीत ख़ुशी का हो सकतीं हैं,
मगर ये दिल ना जाने क्यों
बस दुख के राग सुनाता है |
कितने ही क्षण होते जिनको
हँसके उत्सव कर सकता पर,
उनमें भी यह बीते दुख में,
डूबके अश्रु बहाता है |
सबको ज्ञात यहाँ पर है कि,
सुख-दुख जीवन के हिस्से हैं |
कोई ऐसा मनुज नहीं है,
जिसके बस सुख के किस्से हैं |
जो संग हैं उनकी संगत में ये चेहरा जो खिल सकता है
छोड़ गए जो नाते उनकी याद में यह मुरझाता है |
ऐसा नहीं है सम्भव कि,हर एक सपन साकार हो सके ||
जिनसे मन का मोह जुडा,सब पर अपना अधिकार हो सके |
जो भी सुखद मिला जीवन से
उसका जश्न मना सकता पर,
जो कुछ मिला नहीं चाहत का
उसका शोक मनाता है |
कुछ भी वश में नहीं है अपने,
सारा खेल विधानों का है |
कोशिश करते रहना ही बस,
काम यहाँ इंसानों का है |
मन को है मालूम फ़िकर से कुछ भी ठीक नहीं हो सकता,
फिर भी आग में चिंता के यह, खुद को नित्य जलाता है |
Rinki Singh