दिल परेशां है मुस्कुराने से
बाज़ भी आओ आज़माने से
तुमने रुसवा किया बहुत हमको
अब शिकायत नहीं ज़माने से
ख़ुद पे इल्ज़ाम ये नहीं लेती
मौत आती है इक बहाने से
काश आएं वो बज़्म में मेरी
मुँतज़िर हूं मैं इक ज़माने से
देखते देखते गुज़र जाए
ज़िंदगी कम नहीं फसाने से
Asad Khan Lakhimpuri (Barwar)